Husn Ki Tareef Shayri

सर-ए-बाम, हुस्न-वरी, या शम-ए-तूर है जैसे चराग़-ए-मिनार, की ज़ौ, दूर-दूर है है चेहरे-ए-अनवरी, पे, माहे-नौ

सर-ए-बाम,  हुस्न-वरी,  या  शम-ए-तूर है जैसे  चराग़-ए-मिनार, की  ज़ौ,  दूर-दूर है है  चेहरे-ए-अनव…

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