मशहूर-ओ-मा'रूफ़ नाज़िम ए बज़्म-ए-सुख़न व शायर अनवर जलालपुरी की बरसी के मौके पर छोटा सा लेख...

 



मशहूर-ओ-मा'रूफ़ नाज़िम ए बज़्म-ए-सुख़न व शायर पद्मश्री अनवर जलालपुरी की चौथी बरसी के मौके पर छोटा सा लेख...

"ग़ज़लों की शायरी की हिफाज़त करते रहें

कुछ इस ख़ुश-अंदाज़ से निज़ामत करते रहें"

अदना सी कोशिश

~मोहसिन ख़ान

"ग़ज़लों की शायरी की हिफाज़त करते रहें

कुछ इस ख़ुश-अंदाज़ से निज़ामत करते रहें"


अनवर जलालपुरी उर्दू जगत या यूं कहिए की उर्दू शायरी के एक महान शायर रहे हैं और आपकी निज़ामत का कोई सानी नहीं है


एक ऐसा नाम जिनकी निज़ामत के बिना मुशायरों को तसव्वुर करना जैसे किसी काम का गैर मुकम्मल होना


उन्होंने श्रीमद भगवत गीता का जिस मेहनत जिस लगन के साथ ऊर्दू तर्जुमा किया है इसके लिए उन्हें ऊर्दू का वेदव्यास कहना गलत नहीं होगा इसके अलावा भी उन्होंने रामचरितमानस व अन्य उपनिषदों के भी तर्जुमे किए हैं.


उनके कुछ शेर...


उम्र भर जुल्फ-ए-मसाऐल यूँ ही सुलझाते रहे

दुसरों के वास्ते हम खुद को उलझाते रहे


हज़ारों ज़ख्म खाकर भी मैं ज़ालिम के मुक़ाबिल हूँ

खुदा का शुक्र है अब तक दिले खुद्दार ज़िन्दा है


दुश्मन को दुआ दे के ये दुनिया को बता दो

बाहर कभी आपे से समुन्दर नही होता


बाल चाँदी हो गये दिल ग़म का पैकर हो गया

ज़िन्दगी में जो भी होना था वह ‘अनवर’ हो गया


अदना सी कोशिश

~मोहसिन ख़ान




M Farooq Sumro

I am a vlogger. Making vlogs is my passion.

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