HomeDeedar दीदार की तलब हो तो नज़रे जमाये रखना ग़ालिब, क्यूंकि नकाब हो या नसीब…..सरकता जरुर है !! byM Farooq Sumro -December 21, 2021 0 दीदार की तलब हो तो नज़रे जमाये रखना ग़ालिब,क्यूंकि नकाब हो या नसीब…..सरकता जरुर है !! Tags Deedar Gulshan-e-Shayri Romantic Shayri Facebook Twitter