बेवफा शायरी | Bewafa Shayri


हमने तो एक ही शख्स पर अपनी #चाहत ख़त्म कर दी, अब मुहब्बत किसे कहते है हमे मालूम नहीं!!



वादो से बंधी #जंजीर थी जो तोड दी मेने, अब से जल्दी सोया करेंगे , #मुहब्बत छोड दी मेने!!



तुम रख न सकोगे मेरा तोहफा संभालकर, वरना मैं अभी दे दूँ, जिस्म से रूह निकालकर!!



हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का, बड़ी सादगी से कहते है मजबूर थे हम!!



जरा देखो तो, ये दरवाजे पर #दस्तक किसने दी है,

अगर इश्क हो तो, कहना अब दिल यहाँ नही रहता!



है परेशानियाँ यूँ तो बहुत सी ज़िंदगी में, तेरी मुहब्बत सा मगर कोई तंग नहीं करता!!



अजीब कशमकश है जान किसे दें, वो भी आ बैठे और मौत भी!!



वो मेरी तन्हाइयों का हिसाब क्या देगी, जो खुद ही सवाल है वो जवाब क्या देगी!!



सालो बाद मिले थे, हम एक दूसरे से,

उसकी गाडी बड़ी थी और मेरी दाढ़ी!!



उसने कहा भूल जाओ मुझे हमने भी कह दिया, कौन हो तुम!!



ताजमहल को बनाना तो हमें भी आ गया है अब,

कोई एक मुठ्ठीभर वफ़ा अगर ला दे, तो हम काम शुरू करें!!



अजीब रंगो में गुजरी है मेरी जिंदगी, दिलों पर राज़ किया पर मुहब्बत को तरस गए!!



जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…



अजीब रंगो में गुजरी है मेरी जिंदगी, दिलों पर राज़ किया पर मुहब्बत को तरस गए!!



हमने सिर्फ अपने आंसूऒ की वजह लिखी है, पता नहीं लोग क्यों कहते है, वाह क्या शायरी लिखी है ।”



शराब और मेरा कई बार ब्रेकअप हो चुका है, पर कमबख्त हर बार मुझे मना लेती है



“लगाकर आग़ सीने में, कहाँ चले हो तुम हमदम? अभी तो राख़ उडने दो, तमाशा और भी होगा !”



“लगाकर आग़ सीने में, कहाँ चले हो तुम हमदम? अभी तो राख़ उडने दो, तमाशा और भी होगा !”



वो मेरी #हसरत थी मैं उसकी जरुरत था ..

फिर क्या था

जरुरत पूरी हो गई हसरत अधूरी रह गई



हाल पूछा न खैरियत पूछी

आज भी उसने,

हैसियत पूछी.



हर ज़ुल्म तेरा याद है भूला तो नहीं हूँ,

ऐ वादा #फरामोश मैं तुझ सा तो नहीं हूँ..



जला दी #जीन्दगी जब जैसे जरुरत थी

अब धुंए पर बहस कैसी और राख पर तमाशा कैसा

M Farooq Sumro

I am a vlogger. Making vlogs is my passion.

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