Phoolon Mein Ab Kahaan? Vo Tabassum Nikhara Kee,
Kitanee Shikasta Haal Hai Rangat Bahaar Kee
Har Shakhs Usakee Lay Mein_Giraphtaar Ho Gaya,
Itanee Shadeed Raag Hai___Dil Ke Gitaar Kee
Kya? Phan Ke Shoor Mein Hai Musavvir Ko Dastaras,
Tasveer Bana Raha Hai Jo____Mere Meyaar Kee
Gurbat Mein Rakh Gaya Koee_Mittee Ko Chaak Par,
Tab Se Chal Rahee Hai___Mashaqqat Kumhaar Kee
Hijr Ke Gam Se Uthee_______Tees Se Dam Ghutata Hai,
Jaise Dhadakan Pe Ragad Lagatee Ho Dil Ke Gubaar Kee
Phakhat, Palastar Ke Tootane Se Imaarat Nahee Giratee,
Yahaan Jaale Bhee Kar Rahen Hai_Hiphaazat Deevaar Kee
Hai Beshak Vo Bulandi Par__Sadiyon Se Ba-vakaar,
Qaim Hai Ab Bhee Shaukat, Shaah Ke Meenaar Kee
Jab Mannat Ke Sabhee_____Vird Vazeefe Gaye Khaalee,
To Main Jaalee Pe Baandh Aaya, Ik Dhaaga Mazaar Kee
Main Kamaane Kee Khvaahish Mein, Jab Apano Se Hua Door,
Us Din Se Khatm Ho Gaee_____Lazzat Pagaar Kee
Tum Dil Ke Maraasim Ko, Masail Na Samajhana ,
Hamanen Bhee Muhabbat Kee_____Aur Be-shumaar Kee
Shaayar Ke Ilm Kee____Koee Sarahad Nahin Hotee,
Vo To Misare Se Bunata Hai, Vust Hisaar Keed nahin hotee,
vo to misare se bunata hai, vust hisaar kee
✍🏻✍🏻 Imtiyaz Qureshi
फूलों में अब कहाँ? वो तबस्सुम निखा़र की,
कितनी शिकस्ता हाल है___रंगत बहार की |
हर शख्स उसकी लय में_गिरफ्तार हो गया,
इतनी शदीद राग है___दिल के गिटार की |
क्या? फन के शऊर में है मुसव्विर को दस्तरस,
तस्वीर बना रहा है जो____मेरे मेयार की |
ग़ुर्बत में रख गया कोई_मिट्टी को चाक पर,
तब से चल रही है___मशक़्क़त कुम्हार की |
हिज्र के ग़म से उठी_______टीस से दम घुटता है,
जैसे धड़कन पे रगड़ लगती हो दिल के गुबार की |
फख़त, पलस्तर के टूटने से इमारत नही गिरती,
यहाँ जाले भी कर रहें है_हिफाज़त दीवार की |
है बेशक वो बुलंदि पर__सदियों से बा-वकार,
क़ाइम है अब भी शौकत, शाह के मीनार की |
जब मन्नत के सभी_____विर्द वज़ीफ़े गये खाली,
तो मैं जाली पे बाँध आया, इक धागा मज़ार की |
मैं कमाने की ख्वाहिश में, जब अपनो से हुआ दूर,
उस दिन से खत्म हो गई_____लज़्ज़त पगार की |
तुम दिल के मरासिम को, मसाइल न समझना ,
हमनें भी मुहब्बत की_____और बे-शुमार की |
शायर के इल्म की____कोई सरहद नहीं होती,
वो तो मिसरे से बुनता है, वुसअ'त हिसार की |
✍🏻✍🏻 इम्तियाज कुरैशी
तबस्सुम - मुस्कान,
निखा़र - सौंदर्य, beauty
शिकस्ता-हाल - टूटा हुआ, पीड़ित अवस्था में
लय - स्वर, माधुर्य
शदीद - तीव्र, अत्याधिक
गिटार - 🎻🎸, वाघयंत्र
राग - धुन, तान, तराना
फन - कला, आर्ट
शऊर - अनुभव, योग्यता, ज्ञान, काम करने का ढंग
मुसव्विर - चित्रकार, आर्टिस्ट
दस्तरस - ability, महारत, महानता, पहुँच
मेयार - लेवल, स्तर, मापदंड, व्यक्तित्व
ग़ुर्बत - गरीबी, निर्धनता
मशक़्क़त - कठिन परिश्रम वाला कार्य, मेहनत, श्रम
हिज्र - जुदाई, प्रिय से बिछड़ना, विछोह, वियोग
टीस - दिल में धड़क से उठने वाला दर्द, तीव्र वेदना
गुबार - दिल का मेल
जाले - मकड़ी के जाले
बुलंदि - ऊंचाई, ऊंचाइयों पर
बा-वकार - प्रतिष्ठित, पूरे सम्मान के साथ
क़ाइम - दृढ़, टिकाऊ, स्थायी, टिकी हुई
शौकत - वैभव, एश्वर्य, शान
शाह - बादशाह, सम्राट
मीनार - यहाँ इसका संबंध दिल्ली के कुतुब मीनार से है
मन्नत - मुराद, विशिष्ट कामना, मनौती
विर्द - जाप, इबादत, दुआ, प्रार्थना
वज़ीफ़े - निरंतर की जाने वाली इबादत, साधना
जाली - दरगाह पर धागा बांधने का स्थान
मज़ार - दरगाह, सूफी-संतों की समाधि
लज़्ज़त - यहाँ पर इसका संबंध मज़े या ख़ुशी से है
पगार - तनख्वाह, सैलेरी, वेतन
मरासिम - रिश्ता, संबंध
मसाइल - प्रॉब्लम्स, समस्या, मसला
बे-शुमार - जिसकी हद या सीमा न हो, असीमित, अनंत
शायर - poet, शायरी लिखने वाला, कवि,
इल्म - जानकारी, ज्ञान, शिक्षा, प्रज्ञता, विद्वत्ता
सरहद - सीमा, दायरा
मिसरे - शायरी की एक लाइन या कविता की एक पंक्ति
बुनता - क्रिएशन, बनाना या निर्मित करना,
वुसअ'त - विस्तार, फैलाव, प्रसार
हिसार - परिधि, घेरा, चक्र, चारों ओर का फैलाव
