siyaasat ko fakat apanee tijaarat na samajhana is mulk kee gaddee ko viraasat na samajhana



 ग़ज़ल 

1.

सियासत को फ़कत अपनी तिजारत न समझना 

इस मुल्क की गद्दी को विरासत न समझना 

2.

किरदार यहाँ सबका ही सब देख रहे हैं

रहती है सदा दास हुकूमत न समझना 

3.

करो काम सभी ऐसे करे देश तरक्की 

ताक़ीद हमारी है शिकायत न समझना 

4.

इस भूल पे रोने के सिवा कुछ नहीं हासिल 

जनता के  इशारे की बग़ावत न समझना 

5.

पड़ता है इसी बात पे पछताना किसी दिन

 इस देश के कानून की ताक़त न समझना

6.

किस दर्जा पड़ी मँहगी मुझे आज ये आदत 

ऐ दोस्त बुज़ुर्गों की नसीहत न समझना

7.

मैं ख़ूब समझता हूँ हुनरदारी तुम्हारी

क्यों मेरी ज़रूरत को ज़रूरत न समझना 

8.

इक रोज़ उतारेगी यही ताज भी *साग़र*

मख़लूक के लहजे की हरारत न समझना


🖋️विनय साग़र जायसवाल

9/1/2021

तिजारत-व्यापार

विरासत-धरोहर

ताक़ीद-चेतावनी ,किसी बात को ज़ोर देकर कहना 

मख़लूक़-सांसारिक लोग ,मनुष्य

M Farooq Sumro

I am a vlogger. Making vlogs is my passion.

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