New Year Shayri

क़िस्से बनेंगे अब के बरस भी कमाल के
पिछला बरस गया है कलेजा निकाल के
तुमको नया ये साल मुबारक हो दोस्तों
मैं जख़्म गिन रहा हूँ अभी पिछले साल के
माना कि जिंदगी से बहुत प्यार है मगर
कब तक रखोगे काँच का बर्तन संभाल के ?
ऐ मीर-ए-कारवां मुझे मुड़ कर ना देख तू
मैं आ रहा हूँ पाँव के काँटे निकाल के
(मीर-ए-कारवां = काफ़िले का सरदार)
-ख़लील धनतेजवी

Kisse banenge ab ke baras bhee kamaal ke
pichhalabaras gaya hai kaleja nikaal ke
tumako naya ye saal mubaarak ho doston main jakhm gin raha hoon abhee pichhale saal ke
maana ki jindagee se bahut pyaar hai magar
kabb tak rakhoge kaanch ka bartan sambhaal ke ?
aii meer-e-kaaravaan mujhe mud kar na dekh too main aa raha hoon paanv ke kaante nikaal ke
Khaleel Dhantejavi
क़िस्से बनेंगे अब के बरस भी कमाल के
पिछला बरस गया है कलेजा निकाल के
तुमको नया ये साल मुबारक हो दोस्तों
मैं जख़्म गिन रहा हूँ अभी पिछले साल के
माना कि जिंदगी से बहुत प्यार है मगर
कब तक रखोगे काँच का बर्तन संभाल के ?
ऐ मीर-ए-कारवां मुझे मुड़ कर ना देख तू
मैं आ रहा हूँ पाँव के काँटे निकाल के
(मीर-ए-कारवां = काफ़िले का सरदार)
-ख़लील धनतेजवी