कोई #ज़ुस्तज़ु नहीं, बस एक #ज़ुस्तज़ु के बाद,
हर #आरज़ू ख़त्म, एक तेरी #आरज़ू के बाद!
#फिजायें खुद बिखेरेंगी #महक मेरी #दास्तां की,
#हवा में गुम हो जाये वो #खुशबू नही हूँ मैं.!
*!!इश्क के चांद को....अपनी पनाह में रहने दो.!!*
.
*!!लबों को ना खोलो.....आंखों को कुछ कहने दो!!*
हर #आरज़ू ख़त्म, एक तेरी #आरज़ू के बाद!
#फिजायें खुद बिखेरेंगी #महक मेरी #दास्तां की,
#हवा में गुम हो जाये वो #खुशबू नही हूँ मैं.!
*!!इश्क के चांद को....अपनी पनाह में रहने दो.!!*
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*!!लबों को ना खोलो.....आंखों को कुछ कहने दो!!*
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