zakhm-e-dil ham dikha nahin sakate
dil kisi ka dukha nahin sakate
vo yahaan tak jo aa nahin sakate
kya mujhe bhi bula nahin sakate
vaada bhee hai to hai qayaamat ka
jis ko ham aazama nahin sakate
aap bhee bahar-e-ashk hain goya
aag dil kee bujha nahin sakate
un se ummeed-e-vasl ai tauba
vo to surat dikha nahin sakate
un ko ghoonghat uthaane mein kya uzr
hosh mein ham jo aa nahin sakate
maangate maut kee dua lekin
haath dil se utha nahin sakate
un ko daava-e-yoosufee aasee
khwab mein bhee jo aa nahin sakate
ज़ख़्म-ए-दिल हम दिखा नहीं सकते
दिल किसी का दुखा नहीं सकते
वो यहाँ तक जो आ नहीं सकते
क्या मुझे भी बुला नहीं सकते
वादा भी है तो है क़यामत का
जिस को हम आज़मा नहीं सकते
आप भी बहर-ए-अश्क हैं गोया
आग दिल की बुझा नहीं सकते
उन से उम्मीद-ए-वस्ल ऐ तौबा
वो तो सूरत दिखा नहीं सकते
उन को घूँघट उठाने में क्या उज़्र
होश में हम जो आ नहीं सकते
माँगते मौत की दुआ लेकिन
हाथ दिल से उठा नहीं सकते
उन को दावा-ए-यूसुफ़ी 'आसी'
ख़्वाब में भी जो आ नहीं सकते
दिल किसी का दुखा नहीं सकते
वो यहाँ तक जो आ नहीं सकते
क्या मुझे भी बुला नहीं सकते
वादा भी है तो है क़यामत का
जिस को हम आज़मा नहीं सकते
आप भी बहर-ए-अश्क हैं गोया
आग दिल की बुझा नहीं सकते
उन से उम्मीद-ए-वस्ल ऐ तौबा
वो तो सूरत दिखा नहीं सकते
उन को घूँघट उठाने में क्या उज़्र
होश में हम जो आ नहीं सकते
माँगते मौत की दुआ लेकिन
हाथ दिल से उठा नहीं सकते
उन को दावा-ए-यूसुफ़ी 'आसी'
ख़्वाब में भी जो आ नहीं सकते
