"ख़्वाब भले टूटते रहे मगर "हौंसले"
फिर भी ज़िंदा हो
"हौसला " अपना ऐसा रखो जहाँ
मुश्किलें भी शर्मिंदा हो !!""........
"कहाँ पर ,क्या 'हारना' है ! ये ज़ज्बात ,जिसके अंदर है,
चाहे दुनियाँ ,फकीर समझे ,फिर भी,वो ही सिकंदर है!
वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर होता देखा है .. !!!
कर सको..तो किसी को खुश करो...दुःख देते ...हुए....तो हजारों को देखा है ।।।
ऊंचाई पर वो लोग ही पहुंचते हैं,
जो बदला लेने की नहीं,
बदलाव लाने की सोच रखते हैं
परख कर बोलना सीखो..
मेरे अज़ीज़ दोस्तो
यहां अल्फाज ही इंसान की..
फितरत बताते हैं
ख्वाहिशों का मुहल्ला बहुत बड़ा होता है....
बेहतर है हम जरूरतों की गली में मुड़ जाएं....
किसी भी रिश्ते को
कितनी भी खूबसूरती से
क्यों ना बांधा जाए,
ज़िन्दगी में एक ऐसे इंसान का होना बहुत
जरूरी है ..........
जिसे हम अपने दिल का हाल बताने के लिए
लफ़्ज़ों की जरूरत ना पड़े .......
अगर नज़रों में इज्जत
और बोलने में
लिहाज न हो
तो वह टूट जाता है...
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